Tuesday, July 26, 2016

लौट आओ ?

यू  तो  निकल चुके हो बहुत दूर तुम
पर फिर भी
कुछ हद तक लौट आओ
वो रेत का समंदर
न नीड है न नीर
मुड़ के देखो तो जरा
निशान तक नहीं 
बस यही से पलट जाओ 
कुछ हद तक लौट आओ 
हाथ थाम के यूं छुड़ाते तो नहीं 
सपने सजा के इस तरह मिटाते तो नहीं 
किसी के लिए न सही 
एक कदम तो बढाओ 
कुछ हद तक लौट आओ 
छोड़ दो शिकवे शिकायत 
न कुछ कहो न सुनो 
कुछ भी न दोहराओ 
कुछ हद तक लौट आओ 
अपनी छवि दिलों से हमारे 
इस  तरह न मिटाओ 
बस कुछ हद तक लौट आओ !!

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