Tuesday, July 26, 2016

लौट आओ ?

यू  तो  निकल चुके हो बहुत दूर तुम
पर फिर भी
कुछ हद तक लौट आओ
वो रेत का समंदर
न नीड है न नीर
मुड़ के देखो तो जरा
निशान तक नहीं 
बस यही से पलट जाओ 
कुछ हद तक लौट आओ 
हाथ थाम के यूं छुड़ाते तो नहीं 
सपने सजा के इस तरह मिटाते तो नहीं 
किसी के लिए न सही 
एक कदम तो बढाओ 
कुछ हद तक लौट आओ 
छोड़ दो शिकवे शिकायत 
न कुछ कहो न सुनो 
कुछ भी न दोहराओ 
कुछ हद तक लौट आओ 
अपनी छवि दिलों से हमारे 
इस  तरह न मिटाओ 
बस कुछ हद तक लौट आओ !!

Tuesday, July 12, 2016

क्या है प्यार ?

क्या है प्यार ?
दो  दिलों  का मिलना ,
मौसम बदलना ,फूलों  का खिलना
चांदनी  की ठण्डी छाँव
या फ़िर अंगारो पे पांव
क्या है प्यार ?
किसी से नाम जुड जाना
एक पहचान मिल जाना
खुशियो की शुरुआत
या काँटों की बारात
क्या है प्यार ?
एक जुनून है एक विस्वास है
सारी दुनियाँ उसके आसपास है
नये सोच मे ढ़ल जाना
या जिन्दगी से कट जाना
क्या है प्यार ?
हर राह की मंजिल या मंजिलों की राह
सब कुछ छोड़ते हुए बस उसी की चाह   
जीवन मे रंग भरना
या हर एक रंग हरना
 क्या है प्यार ?
हर कदम साथ -साथ चलना
दोनों की आँखो मे एक ख्वाव पलना
एक सफर दिल से दिमाग तक
या एक सफर
सपनो से समझोउते तक
क्या है प्यार ?...